इस बरगद के नीचे पुराने बिन्दुवासिनी मन्दिर की आकृति रखी है। मुख्य मन्दिर का गुम्बद आज भी पुराना ही है।
विन्दुवासिनी मंदिर, बरहरवा (जिला- साहेबगंज, झारखण्ड) के कुछ छायाचित्र तथा उसके इतिहास आदि के बारे में संक्षिप्त जानकारियाँ और "पहाड़ी बाबा" के कुछ रोचक प्रसंग...
रविवार, 19 जुलाई 2009
"गुरु-मन्दिर"
"यात्रिका"
"वानप्रस्थ-आश्रम"
"हनुमत पद-चिन्ह"
"विशालकाय हनुमानजी"
"सूर्यास्त"
इस चोटी से वैसे तो सूर्योदय और सूर्यास्त- दोनों का आनंद लिया जा सकता है, मगर सूर्यास्त का दृश्य ख़ास होता है। 'राजमहल की पहाड़ियों' के पीछे छुपते सूर्यदेव।
(इस ब्लॉग के सभी फोटो बरहरवा वासी श्री चंद्रशेखर (न्यू रुपश्री स्टूडियो, विन्दुधाम पथ) द्वारा खींचे गए हैं- सिर्फ़ इस सूर्यास्त वाले फोटो को छोड़कर। उनके डिजीटल कैमरे से इसे मैंने स्वयं खींचा था।)
(इस ब्लॉग को जुलाई' 09 में प्रकाशित किया था. एक साल बाद जुलाई' 10 में मोबाईल के कैमरे से खींचकर मैंने कुछ और फोटो इसमें जोड़े हैं.)
"राजमहल की पहाडियां"
"बाबा की कुर्सी"
रविवार, 28 जून 2009
"अद्वैतम"
शुक्रवार, 12 जून 2009
"एक चिन्ह"
"समाधी स्थल"
शनिवार, 6 जून 2009
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